राष्ट्रीय शिक्षा
नीति 2020 और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम
Shiv Narayan
Faculty of
Education the ICFAI University, Raipur
*Corresponding Author: shivnarayansri@gmail.com
संक्षेपिका :
भारत में राष्ट्रीय शिक्षा नीति
2020 ने शैक्षिक सुधारों के एक बदलाव वाले चरण की शुरुआत की है, जिसमें शिक्षक प्रशिक्षण के वातावरण को फिर से परिभाषित करने पर खास ध्यान
दिया गया है। यह शोध पत्र शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के संदर्भ में NEP 2020 द्वारा प्रस्तुत किए गए कई तरह के अवसरों और चुनौतियों की जांच करता है, और शिक्षा नीति के मुख्य उद्देश्यों और वर्तमान अकादमिक साहित्य से जानकारी
लेता है। यह विश्लेषण शिक्षा नीति के सम्पूर्ण विकास, एकीकृत प्रशिक्षण अधिगम उपागम और शिक्षकों की प्रतिष्ठा, अभिप्रेरणा और व्यावसायिक क्षमताओं को बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर देता है। यह शोध
पत्र प्रस्तावित बदलावों के संभावित लाभों, जैसे: बहुविषयक अधिगम का एकीकरण, बेहतर प्रायोगिक प्रशिक्षण और शैक्षिक तकनीकी,
व्यावसायिक शिक्षा को शामिल करने के बारे में बताता है। हालांकि, यह इन सुधारों को लागू करने की चुनौतियों पर भी प्रकाश डालता है जिसमें आधारभूत संरचना की कमी, संसाधनों का आबंटन और शिक्षक शिक्षा संसाधनों के अंदर व्यवस्थाओं के बदलावों
की ज़रूरत शामिल है। यह शोध पत्र शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में सफल और मजबूत
बदलाव पक्का करने के लिए ज़रूरी कदमों और बदलावों को बताते हुए समाप्त होता है, और उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बदलाव लाने वाले दूरदृष्टि (लक्ष्य) के साथ जोड़ता है। इस विश्लेषण का उद्देश्य
शिक्षा नीति बनाने वालों, शैक्षिक नेतृत्वकर्ता और हितधारक को भारत में शिक्षक शिक्षा के भविष्य को नया
आकार देने की उनकी कोशिशों के बारे में जानकारी देना और उन्हें मार्गदर्शन करना
है।
कुंजी शब्द: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, शिक्षक प्रशिक्षण, एकीकृत प्रशिक्षण, शिक्षा सुधार, बहुविषयक, आधारभूत संरचना, बदलाव लाने वाले कदम, भारत।
प्रस्तावना :
समय के साथ भारतीय शिक्षा
व्यवस्था में कुछ बदलाव हुए हैं, लेकिन उनकी गति सर्वथा धीमी और सीमित रही है। हाल ही में प्रस्तुत राष्ट्रीय शिक्षा
नीति 2020 का उद्देश्य
शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का
प्रस्ताव देकर इसे ठीक करना है, जिसमें शिक्षक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। NEP 2020 ने 21वीं सदी के कक्षाकक्ष के लिए शिक्षक को बेहतर ढंग से तैयार करने के लिए शिक्षक
शिक्षा गतिविधियों में बदलाव की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है। यह शिक्षा नीति
विद्यार्थियों और देश का भविष्य बनाने में शिक्षक की अहम भूमिका को मानती है
(सरदाना एट अल., 2021)। हालांकि, इस शिक्षा नीति
को कामयाबी से लागू करने के लिए इंडियन एजुकेशन सिस्टम में बड़े संरचनात्मक
बदलाव करने होंगे (कुमार एट अल., 2020) ।
एक बड़ी चुनौती यह है कि मौजूदा
"कोचिंग कल्चर" और रटने की आदत से हटकर सीखने के लिए ज़्यादा सर्वांगीण,
एकीकृत और समावेशी उपागम की ज़रूरत है (कुमार और गणेश, 2022)। इसके लिए विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण सोच, सृजनात्मकता, समस्या समाधान और 21वीं सदी की दूसरे कौशल सिखाने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव करने की
ज़रूरत है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए, NEP 2020 शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम में सुधारों का प्रस्ताव
करता है, जिसमें
टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने में शिक्षकों की योग्यता बढ़ाना, सही संसाधनों तक पहुँच में सुधार करना और पूरे संरचना
को बेहतर बनाना शामिल है। हालाँकि, यह काम बहुत बड़ा है। पॉलिसी के हिसाब से, 2035 तक उच्च शिक्षा में सम्पूर्ण नामांकन प्रतिशत को दो गुना करने के लिए, कई नए शैक्षिक संस्थानों को बनाने होंगे। इसके अलावा,शिक्षा नीति को प्रभावशाली तरीके से लागू करने के लिए
फैसले लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना होगा और आर्थिक संसाधनों को फिर से
प्राथमिकता देनी होगी। जैसे-जैसे भारत अपने एजुकेशन सिस्टम को बदलने की इस बड़ी
यात्रा पर निकल रहा है, उन अलग-अलग चुनौतियों और मुद्दों को हल करना बहुत ज़रूरी है जिनकी पहचान की गई
है। तभी NEP 2020 सच में भारत की
आने वाली पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक बन सकती है।
1.1 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत के शिक्षा व्यवस्था को बदलने की एक ज़रूरी पहल
है, जिसमें शिक्षक
शिक्षा कार्यक्रम में सुधार भी शामिल हैं। इस नीति का मकसद लंबे समय से चले आ रहे
मुद्दों को सुलझाना है, जैसे कि सार्वभौमिक बदलावों के साथ तालमेल न बिठा पाना और बड़े सुधारों की
ज़रूरत। असल में, NEP 2020 ज़्यादा अधिगमकर्ता केन्द्रित उपागम की ओर बदलाव पर ज़ोर देती है जो महत्वपूर्ण
सोच, समस्या समाधान और 21वीं सदी के दूसरे
आवश्यक कौशलों को विकसित करती है। NEP 2020 शिक्षकों की ज़रूरी भूमिका को पहचानती है और शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम में
सुधारों का प्रस्ताव करती है।
ये
सुधार तकनीकी में शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने, संसाधनों तक
पहुँच को बेहतर बनाने और आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर केंद्रित हैं (सरदाना एट
अल.,
2021)।
इनका उद्देश्य शिक्षकों को विद्यार्थियों के समग्र विकास को प्रोत्साहित करने के
लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और उपकरणों से सुसज्जित करना है। हालाँकि, NEP 2020 को सफलतापूर्वक
लागू करने में कई प्रमुख चुनौतियाँ भी हैं, जिनमें निर्णय
प्रक्रिया को सरल बनाना, संसाधनों को प्राथमिकता देना और कार्य के व्यापक
पैमाने को समझना शामिल है (कुमार और गणेश-, 2023)। मौजूदा
शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रमों की आलोचना रटने पर आधारित पद्धतियों, व्यावहारिक
प्रशिक्षण की कमी और पुराने पाठ्यक्रम पर अत्यधिक निर्भरता के कारण की गई है।
NEP
2020 का
उद्देश्य शिक्षक-शिक्षा के लिए एक अधिक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करके
इन समस्याओं का समाधान करना है (कुमार और गणेश, 2022)। अंततः, NEP 2020 शिक्षक प्रेरणा
के महत्व और भारतीय समाज में शिक्षकों की प्रतिष्ठा एवं स्थान को पुनर्स्थापित
करने की आवश्यकता को स्वीकार करता है। शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रमों में परिवर्तन
लाकर यह नीति भारत की शिक्षा प्रणाली को नया स्वरूप देने तथा विद्यार्थियों के
बेहतर भविष्य के लिए शिक्षकों को सशक्त बनाने की दिशा में कार्य करती है।
1.2 शोध समस्या और उद्देश्य
यह
शोध-पत्र भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने
में आने वाली चुनौतियों और समस्याओं का विश्लेषण करता है, विशेष रूप से
शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रमों में किए जा रहे परिवर्तनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए।
इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
·
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के
प्रावधानों को समझना और यह जानना कि यह नीति संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) 2030 के साथ किस
प्रकार सामंजस्य स्थापित करती है।
·
NEP 2020 के
कार्यान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों और समस्याओं का विश्लेषण करना, विशेष रूप से
शिक्षक-शिक्षा (Teacher Education) के संदर्भ
में।
·
यह सुझाव प्रस्तुत करना कि भारत
इन चुनौतियों का प्रभावी रूप से कैसे सामना कर सकता है और “सभी के लिए
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा” को बढ़ावा देकर वैश्विक समुदाय को कैसे लाभ पहुँचा सकता है।
इन उद्देश्यों को पूरा करते हुए, यह शोध-पत्र
भारत में शिक्षा सुधार पर चल रही चर्चाओं में सार्थक योगदान देने तथा NEP 2020 के सफल
कार्यान्वयन के लिए एक स्पष्ट रोडमैप प्रदान करने का प्रयास करता है।
1.3 अध्ययन का
महत्व:
यह अध्ययन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत
शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रमों में प्रस्तावित परिवर्तनों का विश्लेषण करता है। इसका
उद्देश्य नीति-निर्माताओं, शैक्षणिक
संस्थानों और शिक्षकों सहित प्रमुख हितधारकों को आवश्यक जानकारी और व्यावहारिक
सुझाव प्रदान करना है।
यह शोध-पत्र शिक्षक-शिक्षा में NEP 2020 द्वारा सुझाए
गए प्रमुख सुधारों को प्रकाश में लाएगा, शिक्षण
गुणवत्ता और शैक्षणिक परिणामों पर उनके संभावित प्रभावों का मूल्यांकन करेगा, कार्यान्वयन
के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करेगा तथा व्यवहारिक समाधान सुझाएगा।
अध्ययन शिक्षकों के व्यावसायिक विकास को दिशा देने, नीति-निर्माताओं
को NEP 2020 के सुधारों को प्रभावी रूप से
लागू करने में मार्गदर्शन प्रदान करने और शैक्षणिक संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम
एवं शिक्षण-पद्धतियों को उन्नत बनाकर भारत में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में
सहायता करने के लिए महत्वपूर्ण है।
1.4 कार्यविधि (Methodology)
यह
अध्ययन गुणात्मक अनुसंधान पद्धति (Qualitative Research Methodology) का उपयोग करता
है,
जिसमें
संबंधित साहित्य एवं नीति-दस्तावेजों का विस्तृत अवलोकन और विश्लेषण शामिल है।
अध्ययन के प्रमुख चरणों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा
शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रमों में उसके प्रभाव से संबंधित अकादमिक लेखों, नीति-पत्रों और
रिपोर्टों का व्यापक साहित्य समीक्षा (Comprehensive Literature Review) सम्मिलित है।
अनुसंधान
दल ने प्रस्तावित सुधारों को समझने तथा शिक्षक-शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानकों और
सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) के साथ उनकी संगति का मूल्यांकन करने
हेतु नीति-दस्तावेजों का गहन विश्लेषण किया। इसके अतिरिक्त, अध्ययन ने नीति
के प्रावधानों तथा भारतीय शिक्षा प्रणाली की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा के
आधार पर NEP
2020 के
क्रियान्वयन में संभावित चुनौतियों और समस्याओं की पहचान की, विशेष रूप से
शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रमों में सुधार के संदर्भ में इसके बाद, अध्ययन ने इन
चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत करने और शिक्षक-शिक्षा के क्षेत्र में NEP 2020 के सुधारों को
प्रभावी रूप से लागू करने हेतु प्रमुख अंतर्दृष्टियों (Insights) का समन्वयन (Synthesis) किया और
व्यवहारिक सुझाव (Practical Recommendations) तैयार किए।
इस
अध्ययन में डेटा-संग्रह और विश्लेषण मुख्य रूप से गुणात्मक (Qualitative)
प्रकृति
के हैं,
जो
प्रासंगिक साहित्य एवं नीति-दस्तावेजों की गहन व्याख्या और संकलन पर आधारित हैं।
यह गुणात्मक दृष्टिकोण NEP 2020 के अंतर्गत
शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रमों में प्रस्तावित परिवर्तनों की व्यापक एवं सूक्ष्म समझ
प्रदान करने के उद्देश्य से अपनाया गया है, ताकि
नीति-निर्माताओं, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य हितधारकों को सुधारों के सफल
क्रियान्वयन हेतु मूल्यवान, प्रमाण-आधारित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सके।
2. साहित्य
समीक्षा
(Literature Review)
राष्ट्रीय
शिक्षा नीति (NEP)
2020 भारत
में शिक्षक-शिक्षा में सुधार के लिए एक बहुआयामी (Multifaceted) दृष्टिकोण
प्रस्तुत करती है। इसमें संस्थानों का पुनर्संरचना (Restructuring), पाठ्यक्रम का
पुनर्निर्माण (Curriculum
Redesign), शिक्षक
भर्ती एवं व्यावसायिक विकास (Professional Development) को मजबूत करना
तथा शिक्षकों के कार्य वातावरण को बेहतर बनाना शामिल है (सरदाना एट अल., 2021)।
NEP
2020 भारत
सरकार की एक ऐतिहासिक पहल है, जिसका उद्देश्य देश की शिक्षा प्रणाली में
व्यापक परिवर्तन लाना है। यह नीति विद्यालय संरचना, पाठ्यक्रम, आकलन पद्धति (Assessment)
में
बदलाव तथा शिक्षक-शिक्षा और व्यावसायिक विकास पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने
जैसे अनेक सुधार प्रस्तुत करती है (ड्राफ्ट नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2016; 2017 के लिए कुछ
इनपुट)। शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रमों में परिवर्तन NEP 2020 के प्रमुख
स्तंभों में से एक है (कुमार एट अल., 2020)।
नीति
शिक्षक-शिक्षा को परिवर्तित करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधारों का प्रस्ताव करती
है। इनमें शिक्षक-शिक्षा को स्नातक एवं स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के साथ एकीकृत
करना,
बहुविषयी
(Multidisciplinary)
शिक्षक
शिक्षा संस्थानों की स्थापना, प्रायोगिक प्रशिक्षण (Practical Training) को सुदृढ़ करना, राष्ट्रीय
व्यावसायिक मानक (National Professional Standards for Teachers – NPST) लागू करना तथा
शिक्षक पेशे को अधिक आकर्षक बनाना शामिल हैं। इन सुधारों का उद्देश्य शिक्षण की
गुणवत्ता में वृद्धि करना तथा शिक्षकों को 21वीं सदी के शिक्षार्थियों
की आवश्यकताओं के अनुरूप आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना है।
NEP
2020 में
प्रस्तावित शिक्षक-शिक्षा सुधार संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (Sustainable
Development Goal - SDG) 4 “सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा” के उद्देश्यों
के अनुरूप हैं,
क्योंकि
ये शिक्षक-शिक्षा की गुणवत्ता, पेशे की प्रतिष्ठा और प्रभावशीलता बढ़ाने पर
केंद्रित हैं (शुक्ला एट अल., 2023)। तथापि, इन सुधारों के
सफल कार्यान्वयन के लिए व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन, पर्याप्त निवेश, संसाधनों की
उपलब्धता,
नौकरशाही
बाधाओं को कम करने और देशभर में सुधारों के प्रभावी विस्तार जैसी चुनौतियों का
समाधान आवश्यक है।
2.1 शिक्षक-शिक्षा पर
सैद्धांतिक दृष्टिकोण (Theoretical Perspectives on
Teacher Education)
NEP 2020 के अंतर्गत प्रस्तावित
शिक्षक-शिक्षा सुधार विभिन्न शैक्षणिक सिद्धांतों पर आधारित हैं, जो शिक्षकों
की भूमिका, सीखने की प्रक्रिया और
शिक्षा-प्रणाली में उनके महत्व को रेखांकित करते हैं।
• शिक्षार्थी-केंद्रित
दृष्टिकोण (Learner-Centred Approach)
NEP 2020 एक ऐसे शिक्षा तंत्र पर बल देता
है जो अधिक शिक्षार्थी-केंद्रित हो। इसके लिए आवश्यक है कि शिक्षक विद्यार्थियों
में सक्रिय सीखने (Active Learning) को
प्रोत्साहित करने हेतु उपयुक्त ज्ञान और कौशल से सुसज्जित हों (सरदाना एट अल., 2021)।
• सामाजिक-सांस्कृतिक
सिद्धांत (Sociocultural Theory)
इस सिद्धांत के अनुसार, शिक्षक सीखने
के सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ का निर्माण करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जो छात्रों
के सीखने और विकास पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है (यून, 2021; बशीर-अली, 2011; कुमार एवं
गणेश, 2022)।
• निर्माणवादी
सिद्धांत (Constructivist Theory)
यह सिद्धांत सीखने की प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका पर
ज़ोर देता है, जिसमें शिक्षक छात्रों को अपने
ज्ञान का निर्माण करने, विषय-वस्तु
से सक्रिय रूप से जुड़ने और उसे गहराई से समझने में सहायता करते हैं (कुमार एवं
गणेश, 2022)।
• प्रेरक कारक
(Motivational Factors)
अनुसंधान से पता चलता है कि आंतरिक प्रेरणा, परोपकार के
मूल्य और शिक्षण-व्यवसाय की समझ जैसे कारक व्यक्तियों के शिक्षण को करियर के रूप
में चुनने पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं (सरदाना एट अल., 2021)।
• चिंतनशील
अभ्यास (Reflective Practice)
प्रभावी शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रमों को चिंतनशील अभ्यास को
प्रोत्साहित करना चाहिए, जिससे शिक्षक
अपने शिक्षण तरीकों और रणनीतियों का नियमित मूल्यांकन एवं सुधार कर सकें (डांगे और
सिद्दाराजू, 2020)।
इन सैद्धांतिक ढाँचों से NEP 2020 में
प्रस्तावित शिक्षक-शिक्षा सुधारों को मजबूत आधार मिलता है। ये सिद्धांत
उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने और विद्यार्थियों के समग्र विकास में
शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं। इन
दृष्टिकोणों को समाहित करते हुए NEP 2020 का उद्देश्य
एक उच्च कौशलयुक्त, प्रेरित और चिंतनशील शिक्षकीय
बल (Teaching Workforce) तैयार करना
है, जो छात्रों की आवश्यकताओं के
अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सके।
2.2 वैश्विक
शिक्षक-शिक्षा मॉडलों के साथ तुलनात्मक दृष्टि:
NEP 2020 में प्रस्तावित शिक्षक-शिक्षा
सुधार अनेक देशों के सफल मॉडलों से प्रेरित हैं। उदाहरण के लिए, बहुविषयी (Multidisciplinary)
शिक्षक-शिक्षा संस्थानों की स्थापना तथा प्रायोगिक
प्रशिक्षण (Practical Training) को सुदृढ़
करने पर बल ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और
नीदरलैंड के प्रभावी शिक्षक-शिक्षा ढाँचों से मेल खाता है (कोर्थगेन एट अल., 2006)।
इसी प्रकार, राष्ट्रीय
शिक्षण मानक (National Teaching Standards) और सतत्
व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development) पर ध्यान कई
विकसित शिक्षा-प्रणालियों में शिक्षण पेशे की गुणवत्ता एवं प्रतिष्ठा को बढ़ाने
हेतु अपनाई गई नीतियों के अनुरूप है।
चीन ने भी शिक्षक-शिक्षा में महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं-जैसे
क्लिनिकल प्रैक्टिस को सुदृढ़ करने के लिए “डबल डेवलपमेंट प्लान” तथा इन-सर्विस
शिक्षकों के विकास हेतु “नेशनल ट्रेनिंग प्लान” (हान, 2012)।
इन वैश्विक रुझानों और सर्वोत्तम प्रथाओं ने NEP 2020 में
नीति-निर्धारण को दिशा प्रदान की है, जिसमें
शिक्षक-तैयारी और व्यावसायिक विकास की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए व्यापक और समग्र (Comprehensive
and Holistic) दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
2.3 मौजूदा
शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रमों में प्रमुख चुनौतियाँ:
लगातार प्रयासों के बावजूद भारत का वर्तमान शिक्षक-शिक्षा
तंत्र कई संरचनात्मक एवं व्यावहारिक चुनौतियों का सामना कर रहा है:-
• सिद्धांत और
व्यवहार के बीच अंतर (Theory-Practice Gap)
परंपरागत शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रमों में सैद्धांतिक ज्ञान
और कक्षा में आवश्यक व्यावहारिक कौशल के बीच पर्याप्त समन्वय का अभाव देखा जाता है
(कुमार एवं गणेश, 2022)।
• व्यावहारिक
प्रासंगिकता की कमी (Lack of Practical Relevance)
कई प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्र-शिक्षकों को वास्तविक
कक्षा-स्थितियों, चुनौतियों और जटिलताओं के लिए
पर्याप्त रूप से तैयार नहीं कर पाते, जिससे
सिद्धांत और व्यवहार के बीच अंतर बढ़ जाता है (कोर्थगेन एट अल., 2006)।
• पुराना
पाठ्यक्रम (Outdated Curriculum)
मौजूदा शिक्षक-शिक्षा पाठ्यक्रम प्रायः “कोचिंग संस्कृति”
एवं रटने-आधारित पद्धतियों को प्रोत्साहित करते हैं। परिणामस्वरूप, शिक्षक 21वीं सदी की
आवश्यक कौशलों-जैसे क्रिटिकल थिंकिंग, क्रिएटिविटी
और समग्र विकास-से वंचित रह जाते हैं।
• अपर्याप्त
प्रायोगिक प्रशिक्षण (Insufficient Practical
Training)
प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की अवधि, गुणवत्ता और
संरचना कई संस्थानों में संतोषजनक नहीं होती। इससे छात्र-शिक्षक विविध
कक्षा-स्थितियों को प्रभावी रूप से संभालने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हो
पाते।
• इन-सर्विस
शिक्षकों के लिए सीमित सहायता (Lack of In-Service Support)
सतत् व्यावसायिक विकास (Continuous
Professional Development) हेतु उपलब्ध अवसर सीमित हैं।
अधिकांश शिक्षकों को नए शिक्षण तरीकों को अपनाने और लागू करने के लिए पर्याप्त
सहायता, संसाधन और प्रशिक्षण नहीं मिल
पाता (ड्राफ्ट नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2016; 2017 के इनपुट)।
भारत की वर्तमान शिक्षक-शिक्षा प्रणाली में मौजूद ये
चुनौतियाँ शिक्षकों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की क्षमता को प्रभावित
करती हैं, और इसी कारण NEP 2020 में सुझाए गए
व्यापक सुधार एजेंडे की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
3. NEP 2020 और टीचर
एजुकेशन रिफॉर्म्स:
NEP
2020 टीचर
ट्रेनिंग की क्षमता और क्वालिफाइड टीचर्स की मांग के बीच मौजूद बड़े अंतर को
पहचानता है,
विशेषकर
भारत के पूर्वी क्षेत्रों में (ड्राफ्ट नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2016, 2017 के कुछ इनपुट्स
के अनुसार)। इस अंतर के कारण प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी देखी गई है और अनेक
अप्रशिक्षित शिक्षक अभी भी शिक्षा प्रणाली में कार्यरत हैं।
भारत
का मौजूदा टीचर एजुकेशन सिस्टम कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसमें प्री-सर्विस
और इन-सर्विस दोनों श्रेणियों के शिक्षकों के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले प्रोफेशनल
डेवलपमेंट और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग तक सीमित पहुँच शामिल है। यह स्थिति शिक्षा
प्रणाली की क्षमता को कमजोर करती है, जिससे वह गुणवत्तापूर्ण
शिक्षा प्रदान करने और विद्यार्थियों के सीखने को प्रभावी रूप से समर्थन देने में
सक्षम नहीं हो पाती।
इसके
अतिरिक्त,
करिकुलम
और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कमियाँ-जैसे संसाधनों की कमी और डिजिटल एक्सेस
का अभाव-NEP
2020 द्वारा
सुझाए गए समग्र (Holistic) और बहु-विषयक (Multidisciplinary) शिक्षण
दृष्टिकोण को लागू करने में बाधा उत्पन्न करती हैं। टीचर एजुकेशन से जुड़े इन
प्रणालीगत मुद्दों का समाधान भारत में शिक्षण और सीखने की गुणवत्ता को परिवर्तित
करने के लिए अत्यंत आवश्यक है (कुमार और गणेश, 2022)।
3.1
प्री-सर्विस टीचर एजुकेशन:
NEP 2020 प्री-सर्विस
टीचर एजुकेशन में प्रमुख सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है, जिनमें टीचर
एजुकेशन संस्थानों का मल्टीडिसिप्लिनरी विश्वविद्यालयों में पुनर्गठन, चार वर्ष के
एकीकृत B.Ed.
कार्यक्रम
का कार्यान्वयन,
प्रैक्टिकल
ट्रेनिंग के समय और गुणवत्ता को बढ़ाना तथा शिक्षकों को आवश्यक ज्ञान, कौशल और पेशेवर
स्वभाव से सुसज्जित करने हेतु लचीले करिकुलम की स्थापना शामिल है (कुमार एट अल., 2020)। इन सुधारों
का उद्देश्य एक अत्यंत कुशल और प्रेरित शिक्षकीय कार्यबल तैयार करना है, जो
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और विद्यार्थियों के समग्र विकास में प्रभावी
योगदान दे सके।
नया करिकुलम फ्रेमवर्क और मानक
NEP 2020 शिक्षक
शिक्षा के लिए ऐसे नए करिकुलम फ्रेमवर्क और मानकों के निर्माण की आवश्यकता पर बल
देता है,
जो
भारत की शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन लाने के व्यापक नीति-परिदृश्य से जुड़े हों।
इसमें निम्नलिखित प्रमुख पहलू शामिल हैं:
•
बुनियादी
कौशलों पर ज़ोर: नीति शिक्षक-शिक्षा के करिकुलम में साक्षरता और
संख्यात्मक क्षमता जैसी बुनियादी कौशलों के विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता
बताती है। इसका उद्देश्य वर्तमान प्रणाली में मौजूद उन चुनौतियों को दूर करना है, जिनके कारण
स्टूडेंट-टीचर्स की सैद्धांतिक समझ और कक्षा-स्तरीय व्यावहारिक आवश्यकताओं के बीच
महत्वपूर्ण अंतर पैदा हो गया है (कुमार और गणेश, 2022)। इन कौशलों को
मजबूत कर नीति एक अधिक अनुकूलनशील शिक्षकीय कार्यबल तैयार करना चाहती है, जो विविध
छात्र-समूहों की सीखने की आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा कर सके।
•
21वीं सदी के
कौशलों का विकास: नया करिकुलम फ्रेमवर्क शिक्षकों में 21वीं सदी की
आवश्यक क्षमताओं-जैसे कि आलोचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान, रचनात्मकता और
डिजिटल क्षमता-को विकसित करने
पर ज़ोर देगा (बडियोज़मान, 2019)। इस परिवर्तन का लक्ष्य शिक्षकों को इस
योग्य बनाना है कि वे विद्यार्थियों के समग्र विकास में सहायक बन सकें और उन्हें
आधुनिक विश्व की जटिल चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार कर सकें, पारंपरिक
“कोचिंग कल्चर” और रटने-आधारित प्रथाओं से आगे बढ़ते हुए।
सही एवं अकादमिक रूप से संशोधित पैराग्राफ
NEP
2020 में
प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य एक अत्यंत कुशल और प्रेरित शिक्षकीय कार्यबल तैयार
करना है,
जो
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सके और छात्रों के समग्र विकास को प्रभावी रूप से
समर्थन दे सके। ये सुधार शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रमों में बुनियादी कौशल, 21वीं सदी की
क्षमताओं तथा होलिस्टिक और मल्टीडिसिप्लिनरी लर्निंग को विकसित करने पर केंद्रित
हैं।
3.2
इन-सर्विस टीचर ट्रेनिंग:
NEP
2020 इन-सर्विस
शिक्षकों के व्यावसायिक विकास को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक सुधारों का प्रस्ताव
करती है। नीति उच्च-गुणवत्ता वाले, उत्तरदायी तथा निरंतर चलने वाले प्रशिक्षण
कार्यक्रमों की एक मजबूत प्रणाली विकसित करने की सिफारिश करती है (सरदाना एट अल., 2021)। यह कंस्ट्रक्टिविस्ट अप्रोच पर
बल देती है,
जिसमें
शिक्षक सक्रिय रूप से सीखने की प्रक्रिया में भाग लेते हैं और अपने अनुभवों पर
चिंतन करते हैं। इसके साथ ही, नीति सक्षम स्कूल नेताओं का एक कैडर विकसित करने
पर भी ज़ोर देती है, जो शिक्षकों को मार्गदर्शन और पेशेवर सहयोग प्रदान कर सके
(राउत और बेहेरा, 2014)। इन सुधारों का लक्ष्य एक अत्यंत कुशल, प्रेरित और
सशक्त शिक्षकीय समुदाय तैयार करना है, जो गुणवत्तापूर्ण
शिक्षण और छात्र विकास में सार्थक भूमिका निभा सके।
NEP
2020 प्रभावी
सतत व्यावसायिक विकास (CPD) के लिए चार प्रमुख घटकों को रेखांकित
करती है:
1.
सहयोगात्मक और चिंतनशील प्रथाएँ, जो साथियों से
सीखने और आत्म-मूल्यांकन को बढ़ावा देती हैं (तुली और ओल्जिरा, 2020);
2.
स्कूल-आधारित मॉडल, जो स्थानीय एवं
वास्तविक चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित होते हैं (डोनाहर और वू, 2020);
3.
लगातार चलने वाले, गहन प्रशिक्षण
कार्यक्रम, जो नए विषय-वस्तु और शिक्षण पद्धतियों के साथ गहराई से
जुड़ने के अवसर प्रदान करते हैं (पुत्रा, 2012);
4.
व्यक्तिकृत तथा आवश्यकता-आधारित दृष्टिकोण, जो प्रत्येक
शिक्षक की विशिष्ट जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जाते हैं (डार्लिंग-हैमंड
एट अल.,
2017)।
इन
सुधारों का उद्देश्य शिक्षकों के बीच निरंतर सीखने, आत्म-सुधार और
पेशेवर उन्नति की संस्कृति को विकसित करना है, ताकि वे अपनी
क्षमताओं को समृद्ध कर सकें और छात्र विकास में अधिक प्रभावी योगदान दे सकें।
NEP
2020 तकनीक
और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग के माध्यम से शिक्षक-प्रशिक्षण को और अधिक सशक्त
बनाने पर भी विशेष बल देता है। प्रमुख पहलें शामिल हैं:
1.
ब्लेंडेड और ऑनलाइन ट्रेनिंग को बढ़ावा
देना,
जिससे
लचीले और सुलभ सीखने के अवसर उपलब्ध हो सकें (कुमार और गणेश, 2022);
2.
उच्च-गुणवत्तापूर्ण डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म
और संसाधनों का विकास, जो सामग्री वितरण, सहयोग और
शिक्षण सामग्री तक सहज पहुँच सुनिश्चित करें (ट्विनिंग एट अल., 2013);
3.
शिक्षकों में डिजिटल दक्षता का विकास, जिससे वे तकनीक
का प्रभावी उपयोग कर सकें और तकनीक-सहायित शिक्षण रणनीतियों को समझ सकें (मुकन एट
अल.,
2016)।
इन
तकनीकी हस्तक्षेपों का उद्देश्य प्रशिक्षण को अधिक सुलभ, व्यक्तिगत और
प्रभावी बनाना है, जो भारतीय शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार को समर्थन देगा
(कांजीलाल एट अल., 2022)।
NEP
2020 शिक्षक
शिक्षा और व्यावसायिक विकास को रूपांतरित करने के लिए एक समग्र ढांचा प्रस्तुत
करता है। इसके मुख्य सुधारों में समय-समय पर मूल्यांकन, व्यक्तिगत आकलन
तथा पेशेवर मानकों और करियर प्रगति के बीच गहरे संबंध शामिल हैं। नीति
उच्च-गुणवत्ता वाली प्री-सर्विस ट्रेनिंग, निरंतर और
आवश्यकता-आधारित इन-सर्विस डेवलपमेंट, और तकनीक के प्रभावी
उपयोग पर आधारित है, ताकि एक टिकाऊ, उत्तरदायी और
प्रभावशाली शिक्षक-तैयारी प्रणाली विकसित की जा सके। इस समग्र दृष्टिकोण के माध्यम
से NEP
2020 एक
इंटीग्रेटेड टीचर रजिस्ट्रेशन
सिस्टम, पेशेवर मानक, सतत व्यावसायिक विकास, तकनीक-सक्षम
प्रशिक्षण,
सहयोगात्मक
सीखने और करियर उन्नति के अवसरों को बढ़ावा देता है जिससे भारत में शिक्षक-शिक्षा
की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सके।
3.3
इंस्टीट्यूशनल बदलाव और गवर्नेंस
सुधार
नेशनल
एजुकेशन पॉलिसी 2020 भारत के शिक्षा तंत्र को बेहतर बनाने के लिए
आवश्यक संस्थागत और गवर्नेंस सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत करती है। इनमें प्रमुख
पहलें शामिल हैं:
·
उच्च शिक्षा के लिए एक एकीकृत केंद्रीय नियामक
संस्था की स्थापना।
·
स्कूलों, कॉलेजों और
विश्वविद्यालयों को अधिक स्वायत्तता देकर निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया का
·
विकेन्द्रीकरण।
·
संसाधनों और विशेषज्ञता के साझाकरण को बढ़ावा
देने के लिए "स्कूल कॉम्प्लेक्स" प्रणाली का निर्माण।
·
शिक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश को GDP के न्यूनतम 6% तक बढ़ाना।
·
शिक्षा एवं उद्योग सहित विभिन्न हितधारकों के
बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना।
·
प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन तंत्रों का
कार्यान्वयन ।
NEP
2020 का
उद्देश्य एक अधिक कुशल, विकेन्द्रीकृत और उत्तरदायी शिक्षा प्रणाली
विकसित करना है। यह नीति शिक्षक प्रशिक्षण को मजबूत बनाने में उच्च शिक्षा
संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करती है। साथ ही, इसके
कार्यान्वयन में ब्यूरोक्रेटिक
जड़ता, संसाधनों की कमी और विभिन्न
स्तरों पर विद्यमान असमानताओं जैसी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है
(सर्दाना एट अल., 2021)।
3.4
पेडागॉजिकल इनोवेशन (Pedagogical
Innovation)
नेशनल
एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 भारत में शिक्षण–अधिगम प्रक्रियाओं को रूपांतरित
करने के लिए कई महत्वपूर्ण पेडागॉजिकल इनोवेशन प्रस्तुत करती है। प्रमुख नवाचार इस
प्रकार हैं:
· विद्यार्थियों
में क्रिटिकल
थिंकिंग, समस्या-समाधान और रचनात्मकता जैसे कौशल विकसित करने के लिए हैंड्स-ऑन तथा कम्पिटेंसी-आधारित अधिगम
पर विशेष बल (सरदाना एट अल., 2021; शुक्ला एट अल., 2023)।
· शिक्षा की सुलभता, गुणवत्ता वैयक्तिकरण और बढ़ाने हेतु ऑनलाइन और ब्लेंडेड लर्निंग
सहित डिजिटल प्रौद्योगिकी का व्यापक एकीकरण। इसमें डिजिटल अवसंरचना को उन्नत
करना,
डिजिटल
संसाधनों तक पहुंच को बढ़ाना और शिक्षकों का डिजिटल अपस्किलिंग शामिल है (कुमार एट
अल.,
2020)।
· इंटरडिसिप्लिनरी और मल्टीडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण को बढ़ावा
देना,
जिससे
विद्यार्थी विभिन्न विषय क्षेत्रों का अन्वेषण कर सकें और ज्ञान के कई क्षेत्रों
के बीच सार्थक संबंध स्थापित कर सकें।
· शिक्षा
व्यवस्था को जॉब मार्केट और समग्र अर्थव्यवस्था की बदलती आवश्यकताओं के
अनुरूप बनाने के लिए वोकेशनल
और स्किल ट्रेनिंग पर अधिक जोर देना (कांजीलाल एट अल., 2022)।
· समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना तथा विविधता का सम्मान करते हुए
कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों की पहुंच और सहभागिता में सुधार लाने के उपाय करना।
· शिक्षा की
गुणवत्ता और प्रभावशीलता में निरंतर सुधार के लिए नवीन शिक्षण विधियों और शैक्षिक अनुसंधान
को प्रोत्साहित करना।
NEP
2020 के
ये सभी पेडागॉजिकल इनोवेशन एक ऐसे रोचक, प्रासंगिक और भविष्य-उन्मुख शिक्षा तंत्र का निर्माण करने की
दिशा में केंद्रित हैं, जो विद्यार्थियों को 21वीं सदी की
चुनौतियों और अवसरों के लिए बेहतर रूप से तैयार कर सके।
निष्कर्ष
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 भारत के
शैक्षिक दृष्टिकोण में एक व्यापक और दूरगामी बदलाव का प्रतीक है, जिसका
उद्देश्य 21वीं सदी की चुनौतियों का
प्रभावी रूप से सामना करना है। एक्सेस, इक्विटी, क्वालिटी और
प्रासंगिकता को बढ़ाने पर इसके बहुआयामी फोकस से यह उम्मीद जगती है कि भारतीय
विद्यार्थी बदलते वैश्विक परिदृश्य में अधिक सशक्त और प्रतिस्पर्धी बनकर उभरेंगे। यद्यपि
इन व्यापक सुधारों को लागू करना निस्संदेह चुनौतीपूर्ण है, किंतु
विद्यार्थियों, शिक्षकों और संपूर्ण समाज के
लिए इसके संभावित लाभ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। शिक्षक गुणवत्ता को बढ़ाने, सीखने के
परिणामों में सुधार लाने, और शिक्षा
प्रणाली को सभी स्टेकहोल्डर्स की विविध आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने में निरंतर
निवेश के माध्यम से NEP 2020 भारत की शिक्षा व्यवस्था में सार्थक, स्थिर और परिवर्तनकारी
प्रभाव डालने की क्षमता रखती है। समग्र रूप से यह नीति आने वाली पीढ़ियों को सशक्त
बनाने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है, उन्हें 21वीं सदी की
जटिलताओं का सामना करने तथा देश की सतत प्रगति और समृद्धि में योगदान देने हेतु
आवश्यक ज्ञान, कौशल और चिंतन क्षमता प्रदान
करेगी ।
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