Article in HTML

Cite this article:
सोनेकर , कुमेटी (2011). भारत में मानव संसाधन एवं आर्थिक विकास. Journal of Ravishankar University (Part-A: Science), 16(1), pp.16-19.



भारत में मानव संसाधन एवं आर्थिक विकास

डॉ.बी.एल.सोनेकर , डॉ.सुनील कुमेटी

सहायक प्राध्यापक , अर्थशास्त्र अध्ययनशाला , पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय , रायपुर(छ.ग.)

Emial sondkarptra gmail.com '

सहायक प्राध्यापक , अर्थशास्त्र अध्ययनशाला , पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय , रायपुर (छ.ग.)  Email sunil6782agmail.com

सारांशः किसी भी देश की आर्थिक प्रगति तथा समृद्धि उत्पादन के क्षेत्रों में होने वाली विभिन्न प्रौद्योगिकियों की प्रगति एवं नवप्रवर्तनों पर निर्भर करती है । इस दृष्टि से . भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास और समृद्धि का निर्धारण मानव संसाधनों के कुशल उपयोग पर निर्भर करता है । मानव संसाधन तथा प्राकृतिक संसाधन एक ही गाडी के दो पहियों के समान है , जिनका किसी देश के आर्थिक विकास के लिए होना अनिवार्य है । साथ ही मानवीय संसाधन और आर्थिक विकास में प्रत्यक्ष सबंध होता है । क्योकि आर्थिक विकास में तकनीकी ज्ञान शिक्षा , नवीन अविष्कार , तकनीकी प्रयोग आदि का विशेष महत्व होता है जिनका संबंध मानव संसाधन से है । जब तक देश में उपलब्ध श्रम शक्ति का पूर्णरूपेण विकास नही किया जाएगा , तब तक आर्थिक विकास का लक्ष्य अमूरा रहेगा । क्योंकि सबसे मूल्यवान पूंजी वह है जो मानव मात्र में विनियोजित की जाए । मानव संसाधनों के अन्तर्गत न केवल जनसंख्या के आकार का आययन किया जाता है बल्कि जनसंख्या वृद्धि दर , साक्षरता , लिंगानुपात , जीवन प्रत्याशा , व्यावसायिक वितरण आदि का अध्ययन किया जाता है । प्रस्तुत अध्ययन उपरोक्त कारकों के आधार पर मानव संसाधन एवं आर्थिक विकास का अध्ययन करना है ।

शब्द कुंजी : मानव संसाधन , आर्थिक विकास कौशल विकास कार्यक्रम ।

NOTE: Full version of this manuscript is available in PDF.



Related Images:

Recomonded Articles:

Author(s): बी.एल.सोनेकर; सुनील कुमेटी

DOI:         Access: Open Access Read More

Author(s): अर्चना सेठी

DOI: 10.52228/JRUA.2023-29-2-2         Access: Open Access Read More