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सत्तार (2002). बालिका शिक्षा के संदर्भ में सर्व शिक्षा अभियान की भूमिका का समीक्षात्मक अध्ययन. Journal of Ravishankar University (Part-A: Science), 15(1), pp.77-79.
बालिका शिक्षा के संदर्भ में सर्व शिक्षा अभियान की भूमिका का समीक्षात्मक अध्ययन
अब्दुल सत्तार
अध्यापक शिक्षा संस्थान,
प. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर
सार
- संक्षेप : साक्षरता
का गुणगान बहुत प्राचीन काल से होता रहा है । " बिना पढ़े नर पशु कहावै , जग में सैकड़ों दुःख उठावे । " निरक्षरता के
अभिशाप को लोग पहले भी समझते थे । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने " हरिजन
बन्धु " में लिखा था - " जन - समूह की निरक्षरता हिन्दुस्तान का पाप है , शर्म है और वह दूर होनी ही चाहिए । देश को
निरक्षरता के कलंक से मुक्ति का सबसे महत्त्वपूर्ण माध्यम महिला साक्षरता है
पूर्वप्रधानमंत्री राजीव गांधी ने छ : राष्ट्रीय मिशनों में से राष्ट्रीय साक्षरता
मिशन को प्राथमिकता देकर देश को निरक्षरता के कलंक से मुक्त कराने की चेष्टा की । 5 मई वर्ष 1988
से
प्रारंभ राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के जन अभियान की शुरूआत हुई जिसका सबसे
महत्त्वपूर्ण उद्देश्य देश में महिला साक्षरता की स्थिति में सुधार लाना ।
प्रस्तुत शोध पत्र साक्षरता मिशन के सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत बालिका शिक्षा
की भूमिका का समीक्षात्मक अध्ययन पर किया गया है ।
शब्द
कुंजी
: बालिका शिक्षा , सर्वशिक्षा अभियान , प्राथमिक शिक्षा
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